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क्यूँ मुझ से ख़फ़ा हो अब तक तुम | अब भूल भी जाओ जाने दो / Kyun Mujh Se Khafa Ho Ab Tak Tum | Ab Bhool Bhi Jao Jane Do

क्यूँ मुझ से ख़फ़ा हो अब तक तुम, अब भूल भी जाओ जाने दो क्यूँ माज़ी की यादों में हो गुम, अब भूल भी जाओ जाने दो ये मेरी दु'आ है कि फिर से एहसास-ए-मुरव्वत हो जाए हम दोनों में रब ही की ख़ातिर यूँ फिर से मोहब्बत हो जाए माज़ी को भुला कर दोनों में फिर दिल से मवद्दत हो जाए दिल साफ़ करो तुम भी अपना, अब मान भी जाओ जाने दो माज़ी के दरीचों से यादें हम को भी सताती रहती हैं वो अपनी लड़ाई की बातें, सब याद भी आती रहती हैं आँखों में हमारी वो बातें, यूँ अश्क भी लाती रहती हैं झगड़ों को भुला कर आ जाओ, बातें न बढ़ाओ जाने दो वो वक़्त भी कैसा अच्छा था, जब साथ निभाया करते थे अल्लाह के रस्ते में हम तुम, यूँ साथ ही जाया करते थे यूँ दीन की मेहनत में हर-जा, हक़ बात सुनाया करते थे आओ कि चलें उस रस्ते पर, नाराज़ी मिटाओ जाने दो रूठे को मनाना अच्छा है ये मैं ने सिफ़ारिश कर दी है अब देर तुम्हारी जानिब है, मैं ने तो गुज़ारिश कर दी है इक तुझ को मनाने की ख़ातिर अश'आर की बारिश कर दी है 'अर्ज़ी है मेरी दिल से प्यारी, अब हँस के दिखाओ जाने दो मैं तुम को मनाने आया हूँ, तुम देर न करना आने में तुम मा'फ़ करो जो...

तमन्ना है शहरों का सरदार देखूँ / Tamanna Hai Shehron Ka Sardar Dekhun

मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना ! मदीना ! सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तमन्ना है शहरों का सरदार देखूँ मदीना की गलियाँ-ओ-बाज़ार देखूँ जहाँ भेज दी रब ने जन्नत बना कर हबीब-ए-ख़ुदा का वो दरबार देखूँ तरसती हैं आँखें जिन्हें देखने को वो गुंबद, वो जाली, वो मीनार देखूँ ग़मों में गुज़ारी है ये ज़िंदगानी ख़ुशी के वहाँ दिन मैं दो-चार देखूँ सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम मदीना के सुक्कान से जा मिलूँ मैं उन्ही का 'अमल तौर-अतवार देखूँ तसव्वुर में इतना मैं खो जाऊँ, या रब ! नबी के ज़माने के अनवार देखूँ मुझे वापसी की इजाज़त मिले ना उसी दर का ख़ुद को गिरिफ़्तार देखूँ सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सल्ले-'अला सय्यिदिना सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम उतरता है रहमत का सावन वहीं पर मलाइक के उस दर पे आसार देखूँ बड़ी नींद ग़फ़लत की सोया रहा मैं वहाँ रात-भर ख़ुद को बेदार देखूँ कहाँ है मज़ा इस ज...

मुझ को भी बुला ले तू हज पे मैं आस लगाए बैठा हूँ / Mujh Ko Bhi Bula Le Tu Hajj Pe Main Aas Lagae Baitha Hun

मुझ को भी बुला ले तू हज पे मैं आस लगाए बैठा हूँ आँखों में बसा कर का'बे को मैं ख़्वाब सजाए बैठा हूँ जाने न कोई क्या दिल में है बस तू ही मेरा वाक़िफ़, अल्लाह ! बरसों की तड़प है, ऐ मौला ! इक बार बुला ले, या अल्लाह ! इक नज़र-ए-करम की सा'अत पर बरसों को भुलाए बैठा हूँ मुझ को भी बुला ले तू हज पे मैं आस लगाए बैठा हूँ आँखों में बसा कर का'बे को मैं ख़्वाब सजाए बैठा हूँ हो शर्फ़-ए-हुज़ूरी मेरी भी मेरा भी अदा हो तवाफ़-ए-हरम मुद्दत से हूँ प्यासा, ऐ मौला ! मुझ को भी मुयस्सर हो ज़मज़म इक शौक़-ए-ज़ियारत इस दिल में हर बार जगाए बैठा हूँ मुझ को भी बुला ले तू हज पे मैं आस लगाए बैठा हूँ आँखों में बसा कर का'बे को मैं ख़्वाब सजाए बैठा हूँ कुछ रंग-ओ-नसल में फ़र्क़ नहीं बस लिपटे हुए इक चादर में शाहों को फ़क़ीरी सिखलाए हर शख़्स भिकारी उस घर में क्या ख़ूब नज़ारा है वल्लाह आँखों में समाए बैठा हूँ मुझ को भी बुला ले तू हज पे मैं आस लगाए बैठा हूँ आँखों में बसा कर का'बे को मैं ख़्वाब सजाए बैठा हूँ रिम-झिम की बरसती बारिश हो और सामने हो वो का'बा तेरा होंटों पे हो जारी मदह तेरी कु...

रब को देखा है मेरे नबी ने और किसी ने भी देखा नहीं है / Rab Ko Dekha Hai Mere Nabi Ne Aur Kisi Ne Bhi Dekha Nahin Hai

सब से प्यारा मेरा नबी है, सब से आ'ला मेरा नबी है रब को देखा है मेरे नबी ने, और किसी ने भी देखा नहीं है सब से पर्दा है मेरे ख़ुदा का, और मुहम्मद से पर्दा नहीं है लाए ईमाँ 'उमर जब नबी पर, बोले आक़ा के क़दमों में जा कर मिल गया है मुझे कमली वाला, अब ज़माने की पर्वा नहीं है रब को देखा है मेरे नबी ने, और किसी ने भी देखा नहीं है सब से पर्दा है मेरे ख़ुदा का, और मुहम्मद से पर्दा नहीं है देखती गर ज़ुलैख़ा नबी को, हुस्न-ए-यूसुफ़ पे हरगिज़ न मरती मेरे प्यारे नबी जैसा जल्वा, हुस्न-ए-यूसुफ़ ने पाया नहीं है रब को देखा है मेरे नबी ने, और किसी ने भी देखा नहीं है सब से पर्दा है मेरे ख़ुदा का, और मुहम्मद से पर्दा नहीं है आप के जैसा अब तक जहाँ में, मुस्तफ़ा ! कोई आया नहीं है आए भी कैसे जब कि ख़ुदा ने कोई दूजा बनाया नहीं है रब को देखा है मेरे नबी ने, और किसी ने भी देखा नहीं है सब से पर्दा है मेरे ख़ुदा का, और मुहम्मद से पर्दा नहीं है अब कहीं दिल नहीं लग रहा है, तयबा जाने को दिल रो रहा है मौत आए मदीने में, अमजद ! और कोई तमन्ना नहीं है रब को देखा है मेरे नबी ने, और किसी ने भी देखा नहीं है सब ...

वो जिस के लिए महफ़िल-ए-कौनैन सजी है | वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है / Wo Jis Ke Liye Mehfil-e-Kaunain Saji Hai | Wo Mera Nabi, Mera Nabi, Mera Nabi Hai

वो जिस के लिए महफ़िल-ए-कौनैन सजी है फ़िरदौस-ए-बरीं जिस के वसीले से बनी है वो हाश्मी, मक्की, मदनी-उल-'अरबी है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है अल्लाह का फ़रमाँ, अलम् नश्रह़् लक स़द्रक मंसूब है जिस से, व-रफ़'अना लक ज़िक्रक जिस ज़ात का क़ुरआन में भी ज़िक्र-ए-जली है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है अहमद है, मुहम्मद है, वो ही ख़त्म-ए-रुसूल है मख़दूम-ओ-मुरब्बी है, वो ही वाली-ए-कुल है उस पर ही नज़र सारे ज़माने की लगी है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है व-श्शम्सुद्दुहा चेहरा-ए-अनवर की झलक है वलैल सजा गेसू-ए-हज़रत की लचक है 'आलम को ज़िया जिस के वसीले से मिली है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है मुज़म्मिल-ओ-यासीन व मुदद्स़्स़िर-ओ-त़ाहा क्या क्या नए अल्क़ाब से मौला ने पुकारा क्या शान है उस की, कि जो उम्मी-लक़बी है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है यासीन-ओ-मुज़म्मिल-ओ-मुदद्स़्स़िर और त़ाहा क्या क्या नए अल्क़ाब से मौला ने पुकारा क्या शान है उस की, कि जो उम्मी-लक़बी है वो मेरा नबी, मेरा नबी, मेरा नबी है वो ज़ात कि जो मज़हर-ए-लौलाक-लमा है जो साहिब-ए-रफ़रफ़ शब-ए-मे'राज हुआ है...

हो मुबारक आ गया है हज का मौसम मोमिनो / Ho Mubarak Aa Gaya Hai Hajj Ka Mausam Momino

हो मुबारक आ गया है हज का मौसम मोमिनो ख़ूब मांगो अब दुआ बा-चश्मे-पुरनम मोमिनो आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया जानिबे-मक्का हुए हैं क़ाफिले चलना शुरू हिज्र के दिन भी अभी ये हो गए ढलना शुरू सैल-ए-अश्क़ अब जल्द ही ये जाएगा थम मोमिनो हो मुबारक आ गया है हज का मौसम मोमिनो ख़ूब मांगो अब दुआ बा-चश्मे-पुरनम मोमिनो आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया गूँजती है हर तरफ ही बस सदा लब्बैक की किस क़दर है रूह-परवर ये अदा लब्बैक की भूल ही जाता है हाजी अपना हर ग़म मोमिनो हो मुबारक आ गया है हज का मौसम मोमिनो ख़ूब मांगो अब दुआ बा-चश्मे-पुरनम मोमिनो आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया एक दिन आएगा हम भी शहरे-दिलबर देखेंगे जीते जी अपनी निगाहों से वो मन्ज़र देखेंगे सामने रोज़े का जलवा, आँखें और हम मोमिनो हो मुबारक आ गया है हज का मौसम मोमिनो ख़ूब मांगो अब दुआ बा-चश्मे-पुरनम मोमिनो आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया आ गया है, आ गया है, हज का मौसम आ गया हज हुवा मक़बू...